झारखण्ड के जनजातीय विद्रोह

 

  • झारखंड के प्रमुख जनजातीय विद्रोह :


झारखंड का विद्रोह देखा जाए तो कई कारणों से हुआ था। लेकिन मुख्य कारण सदनों द्वारा अत्याचार तथा आदिवासियों पर शोषण किया जाना । इसके साथ साथ जब झारखंड में अंग्रेज प्रवेश किए तो उसने झारखंड की प्राकृतिक और खनिज संसाधनों को अपने लाभ के अनुसार प्रयोग कर रहे थे । इन सभी कारणों से आदिवासियों की आजादी छीन ली गई । तथा अंग्रेज द्वारा आदिवासियों को उसके मूल निवास जंगल से निकालकर गांव में भेज दिए।

                        झारखंड में देखा जाए तो मूलनिवासी आदिवासी लोग ही है । लेकिन जब सदन लोग झारखंड पहुंचे तो यहां की प्राकृतिक और खनिज देखकर वह अही पर अपनी मूल स्थान बना ली । जो आगे चलकर आदिवासियों को नुकसान करने लगी। इन सभी कारणों से आदिवासी लोग आक्रोश में आकर अंग्रेजों की विरुद्ध आवाज उठाएं जो आज जनजाति विद्रोह के नाम से जाने जाते हैं।

झारखंड में जनजातियों  द्वारा बहुत सारे विद्रोह किए गए उसमें से कुछ इस प्रकार है ढाल विद्रोह:

1. ढाल विद्रोह(1767_77)

2.चूवार विद्रोह(1769_1805)

3.चेरो विद्रोह(1770_1771)

4.भोक्ता विद्रोह(1771)

5.घटवाल विद्रोह (1772_73)

6.पहाड़िया विद्रोह(1772_82)

7.तमाड़ विद्रोह(1782_1821)

8.तिलका विद्रोह (1784_1785)

9.चेरो विद्रोह (1800_1819)

10.हो विद्रोह (1820_21)

11.कोल विद्रोह(1831_32)

12.संथाल विद्रोह( 1855_56)

13.भूमिज विद्रोह (1832_33)

14.सरदारी विद्रोह(1858_95)

15.खरवाल विद्रोह (1874)

16.बिरसा आंदोलन (1899_1900)

17.ताना भगत आंदोलन(1914)

18.हजारीबाग आंदोलन(1931)

1.ढाल विद्रोह:(1767_77)

झारखंड में अंग्रेजों का प्रवेश सिहभूम की और से हुआ। जिसके कारण सिहभूम को अंग्रेज का प्रवेश द्वार कहा जाता हैं । (चतरा को छोटा नागपुर का प्रवेश द्वार तथा साहिबगंज को बंगाल का प्रवेश द्वार कहा जाता है)

                       ढाल विद्रोह झारखंड में अंग्रेजो के खिलाफ प्रथम विद्रोह था । दाल विद्रोह का अर्थ ढाल राजा के नेतृत्व में संपूर्ण  ढाल राज्य की जनता का विद्रोह 

      अंग्रेजो ने बक्सर के युद्ध( 1764)अंग्रेजों और मीर कासिम, अवध के नवाब सिराजुद्दौला एवं मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के बीच हुआ। इस विद्रोह में अंग्रेज विजय हुआ । इस विद्रोह में अंग्रेज का सेनापति हेक्टर मुनरो के बाद सिंहभूम की दीवानी प्राप्त कर सिंहभूम के क्षेत्र को अपने अधिकार में ले लिया । जिसका परिणाम स्वरूप वहां के लोगों ने विद्रोह कर दिया।

                12 अगस्त 1765 को मुगल बादशाह शाह आलम दितीय जीते ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी मिली

             मार्च 1766 इसमें कंपनी (अंग्रेज) ने तय किया कि यदि सिंहभूम क्षेत्र के राजा गन कंपनी की अधिकतर स्वीकार ना करें तो उसके ऊपर बल प्रयोग किया जाए। जिसके लिए जनवरी 1767 को फर्गुसन को सिहभुम पर आक्रमण करने को कहा । जिससे घाटशिला का राजा (जगरनाथ  ढाल का चाचा) को हराकर बंदी बना लिया गया ।और जगन्नाथ ढाल को राजा बना कर। 5500 सालाना कर देने के लिए  मंजूर किया । ढाल भूमि में आंतरिक अशांति फैल गया । अंग्रेज ने 1768 ईस्वी में लेफ्टिनेंट रूका और बाद में कैप्टन चार्ल्स मोरगन को भेजा लेकिन वह जगन्नाथ ढाल को पकड़ने में असफल रहा उसी समय उसके भाई नींबू ढाल को कंपनी सरकार ने ढालभूम का राजा घोषित कर दिया । नींबू ढाल को राजा बनाएं जाने पर के बाद जगन्नाथ ढाल  विद्रोह करना जारी रखा । और डाल बहू के अधिकांश इलाके पर अपना कब्जा कर लिया । 1767 ईस्वी में कंपनी सरकार द्वारा जगन्नाथ ढाल को राजा स्वीकार किए जाने के बाद  विद्रोह समाप्त हो गया ।

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2. चुवार विद्रोह :(1769_1805)

अंग्रेज जंगलमहल की भूमिजो को चूआर कहते थे (अर्थात नीच जाति )जिसके कारण इस सब में आक्रोश हुई और विद्रोह करने लगा।  इसी प्रकार विद्रोह का नाम  चुवार  विद्रोह पडा।

यह विद्रोह  सिंहभूम में मानभूम बीरभूम बाद में भूम तथा पंचेत राज में हुआ । 1776 ईस्वी में आंदोलन का केंद्र सिल्ली (रांची) जबकि बीरभूम का बाकुडा में 1768 में फैला। इस विद्रोह भूमिज जनजाति ने अंग्रेजों के विरुद्ध बढ़-चढ़कर भाग लिया। 

                  कुछ चूवार अपनी परंपरागत शैली के अनुरूप जीवन व्यतीत कर रहे थे। लेकिन अधिकांश भूमिज स्थानीय जमींदारों के घरों में सिपाही(पाइक) का काम करते थे। जिसके लिए उन्हे पाईकाना जमीन दी जाती थी । जिसे अंग्रेजों ने उसकी सभी जमीन नई जमींदारों को हाथों में बेच दिया और अन्य कर निर्धारित कर दी नई प्रजातियों को भी बसाया गया तब पहले से कम काम रह गया। पाइकों के स्थान पर बाहर के पुलिस को उनकी जगह नियुक्त किया गया । जिसके कारण 1000 पाइक का घरद्वार तथा जीविका का साधन सब कुछ खोकर बेघर हो गया। और तो और बेशुमार 

बढ़ाए गए राजस्व चुकाने में असमर्थ जमींदारों हाथों से जमीन ली गई। 

 यह विद्रोह अकाल, लगान में वृद्धि, जमीन की नीलामी तथा आर्थिक मुद्रा के लेकर किया गया था. 

   विद्रोह का प्रमुख व्यक्ति:

 रघुनाथ महतो, सुबल सिंह,  जगन्नाथ,दुर्जन सिंह, मंगल सिंह ,लाल सिंह ,मोहन सिंह, 

रघुनाथ महतो 1769 में नारा दिया।" अपना गांव अपना राज दूर भगाओ विदेशी राज"


और अच्छे से समझने के लिए दिया गया लिंक को ओपन करे👉👉👉


https://youtu.be/BJXqY3aJ100


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