1857 के विद्रोह

      1857 के विद्रोह और कारण


 


1857 का विद्रोह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ संगठित प्रतिरोध की पहली अभिव्यक्ति थी।

                 यह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सेना के सिपाहियों के विद्रोह के रूप में शुरू हुआ लेकिन अंततः जनता की भागीदारी हासिल कर ली ।

  • विद्रोह का कारण 

राजनीतिक कारण

 1857 के विद्रोह का प्रमुख राजनीतिक कारण अंग्रेज की विस्तारवादी नीति और व्यापगत का सिद्धांत था। बड़ी संख्या में भारतीय शासकों और प्रमुखों को हटा दिया गया,जिससे अन्य सलारूद परिवार के मन में भय पैदा हो गया।

सामाजिक और धार्मिक कारण

भारत में तेज़ी से फैल रही पश्चिमी सभ्यता पूरे देश चिन्ताजनक थी उदाहरण के लिए सती और कन्या , भूर्ण हत्या  जैसी प्रथाओं का उन्मूलन और विधवा पूर्ण विवाह को सही बनाने वाले कानून को स्थापित सामाजिक संरचना के लिए खतरा माना जाता था

                    शिक्षा के पश्चिमी तरीके की पेश करना हिंदूओ के साथ-साथ मुसलमानों के लिए रूढ़िवादी को सीधा चुनौती दे रही थी।

 आर्थिक कारण ग्रामीण

ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि पर भारी करो और कंपनी द्वारा अपनाए गए राजस्व संग्रह के कड़े तरीको से किसान और जमींदार क्रोधित थे 

सैन्य कारण 

1857 विद्रोह एक सिपाही विद्रोह के रूप में शुरू हुआ। भारतीय सिपाहियों ने भारत में 87% से अधिक ब्रिटिश सैनिकों का गठन किया। लेकिन उन्होंने ब्रिटिश सैनिकों से हिना मान जाता था । एक भारतीय सिपाही को समान रैंक के यूरोपीय सिपाही से कम वेतन दिया जाता था।

  •  विद्रोह का विफल के कारण:

 समिति विद्रोह:

विद्रोह काफी व्यापक था लेकिन देश का बड़ा हिस्सा इससे आप्रभावित रहा। विद्रोह मुख्यता दोआब क्षेत्र तक ही सीमित था। बड़ी रियासत हैदराबाद ,मैसूर त्रावणकोर, और कश्मीर साथ ही साथ राजपूताना की छोटी रियासते विद्रोह में शामिल नहीं हुआ ।

  कोई प्रभावित नेतृत्व नहीं:

 विद्रोहयो के पास एक प्रभावी नेता की कमी थी, हालाकि नाना साहब, तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई बहादुर नेता थे, लेकिन वे समाग्र रूप से आंदोलन का प्रभावित नेतृत्व नहीं दे सके।

 समिति संसाधन:

विद्रोहियों के पास पुरुषों और धन के मामले मे संसाधन की कमी थी। दूसरी ओर अंग्रेजों को भारत में पुरुषों धन्नो और हथियारों की निरंतर आपूर्ति प्राप्त हुई 

  निष्कर्ष :

1857 का विद्रोह भारत में ब्रिटिश शासन के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना थी हालाकि इसने सीमित तरीके से भारतीय समाज के कई वर्गों को एक साझा उददेशय के लिए एकजुट किया यदिपी विद्रोह वंचित लक्ष्य को प्राप्त करने में विफल रहा लेकिन इसमें भारतीय राष्ट्रवाद के बीज बोए।……


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